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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में चश्मे (Glasses) के विकल्प के रूप में कॉन्टैक्ट लेंस (Contact Lenses) का इस्तेमाल बहुत आम हो गया है। ऑफिस जाना हो, कोई पार्टी हो या फिर स्पोर्ट्स एक्टिविटी, कॉन्टैक्ट लेंस एक साफ और सुविधाजनक विजन (Clear Vision) देते हैं। लेकिन, जितनी आसानी से हम इनका इस्तेमाल करते हैं, उतनी ही लापरवाही हम इनकी साफ-सफाई (Hygiene) और देखभाल में भी कर देते हैं।
Susanjeevani Hospital के विट्रियो रेटिना स्पेशलिस्ट (Vitreo Retina Specialist) डॉ. मोहित खेमचंदानी के अनुसार, कॉन्टैक्ट लेंस से जुड़ी छोटी सी लापरवाही भी आंखों में गंभीर इन्फेक्शन (Severe Eye Infection), कॉर्नियल अल्सर (Corneal Ulcer) और यहां तक कि हमेशा के लिए आंखों की रोशनी जाने का कारण बन सकती है।
अगर आप भी रोज़ाना या कभी-कभार कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कॉन्टैक्ट लेंस पहनते समय लोग कौन सी 5 सबसे बड़ी गलतियां करते हैं और इनसे कैसे बचा जा सकता है।
यह सबसे आम और सबसे खतरनाक गलती है। दिनभर की थकान के बाद कई बार लोग लेंस निकालना भूल जाते हैं या आलस कर जाते हैं।
हमारी आंखों के सामने के पारदर्शी हिस्से यानी कॉर्निया (Cornea) में खून की नसें (Blood vessels) नहीं होती हैं। कॉर्निया सीधे हवा से ऑक्सीजन लेता है। जब आप कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, तो ऑक्सीजन का प्रवाह वैसे ही थोड़ा कम हो जाता है। लेकिन जब आप लेंस पहनकर सो जाते हैं (आंखें बंद होने पर), तो कॉर्निया को ऑक्सीजन मिलना लगभग बंद हो जाता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में कॉर्नियल हाइपोक्सिया (Corneal Hypoxia) कहते हैं। ऑक्सीजन की कमी से कॉर्निया में सूजन आ जाती है और बैक्टीरिया आसानी से हमला कर देते हैं, जिससे 'स्यूडोमोनास' (Pseudomonas) जैसा गंभीर इन्फेक्शन हो सकता है, जो केवल 24 घंटे के अंदर आंखों की रोशनी छीन सकता है।
चाहे आप कितनी भी देर के लिए सो रहे हों (Power Nap भी), हमेशा सोने से पहले अपने लेंस जरूर निकालें।
अक्सर लोग लेंस पहनकर शावर (Shower) ले लेते हैं या स्विमिंग पूल में चले जाते हैं। यह एक बहुत बड़ी भूल है।
पानी (चाहे वह नल का पानी हो, स्विमिंग पूल का हो, या नदी/झील का) कभी भी पूरी तरह से स्टेराइल (Sterile) नहीं होता। इसमें 'एकेंथअमीबा' (Acanthamoeba) नाम का एक खतरनाक माइक्रोब (सूक्ष्म जीव) पाया जाता है। जब पानी लेंस के संपर्क में आता है, तो यह अमीबा लेंस और आंख के बीच फंस जाता है। यह कॉर्निया को खाना शुरू कर देता है, जिससे 'एकेंथअमीबा केराटाइटिस' (Acanthamoeba Keratitis) नाम का भयानक इन्फेक्शन होता है। इसका इलाज बहुत लंबा और मुश्किल होता है।
नहाते समय, मुंह धोते समय या स्विमिंग करते समय लेंस बिल्कुल न पहनें। यदि आप स्विमिंग के लिए प्रिस्क्रिप्शन गॉगल्स (Prescription swimming goggles) का इस्तेमाल करें तो बेहतर रहेगा।
लेंस को साफ करने और स्टोर करने के लिए एक खास सॉल्यूशन (Contact Lens Solution) का इस्तेमाल किया जाता है। कई लोग पैसे या समय बचाने के लिए लेंस केस में बचे हुए पुराने सॉल्यूशन में ही नया सॉल्यूशन मिला देते हैं। इसे 'Topping Off' कहते हैं।
सॉल्यूशन का काम लेंस पर जमे प्रोटीन और बैक्टीरिया को मारना है। एक बार इस्तेमाल होने के बाद सॉल्यूशन की सफाई करने की क्षमता खत्म हो जाती है। जब आप पुराने सॉल्यूशन में नया मिलाते हैं, तो लेंस केस बैक्टीरिया और फंगस के पनपने का घर बन जाता है। इससे कंजंक्टिवाइटिस (Conjunctivitis) और अन्य इन्फेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
रोजाना लेंस केस का पुराना सॉल्यूशन पूरी तरह फेंक दें। केस को खाली करके हवा में सूखने दें और हर बार स्टोर करने के लिए फ्रेश (Fresh) सॉल्यूशन का ही इस्तेमाल करें।
हमारे हाथ दिन भर में मोबाइल, कीबोर्ड, दरवाजे के हैंडल और न जाने कितनी दूषित चीजों को छूते हैं। बिना हाथ धोए लेंस लगाना या निकालना सबसे बड़ी लापरवाही है।
हाथों में मौजूद अदृश्य कीटाणु (Bacteria, Virus, and Fungi) सीधे लेंस के जरिए आपकी आंखों में प्रवेश कर जाते हैं। इसके अलावा, हाथों में लगा लोशन, तेल या परफ्यूम भी लेंस पर चिपक सकता है, जिससे आंखों में तेज जलन, खुजली और एलर्जी (Allergic Reaction) हो सकती है।
लेंस को छूने से पहले हमेशा अपने हाथों को एंटीबैक्टीरियल साबुन से अच्छी तरह धोएं। इसके बाद हाथों को किसी ऐसे तौलिये (Lint-free towel) से पोछें जिसके रेशे हाथों में न चिपकें। हाथ पूरी तरह सूखने के बाद ही लेंस को छुएं।
हर कॉन्टैक्ट लेंस की एक लाइफ (Lifespan) होती है। कुछ डेली डिस्पोजेबल (Daily disposable) होते हैं, कुछ मंथली (Monthly) या इयरली (Yearly)। कई लोग मंथली लेंस को दो-तीन महीने तक खींच ले जाते हैं।
लेंस जितना पुराना होता जाता है, उस पर आंखों से निकलने वाला प्रोटीन, कैल्शियम और लिपिड उतना ही ज्यादा जमा होने लगता है। समय के साथ लेंस का आकार भी थोड़ा बदल जाता है और वह खुरदरा हो जाता है। इससे आंखों की अंदरूनी सतह छिल सकती है (Corneal Abrasion) और जायंट पैपिलरी कंजंक्टिवाइटिस (GPC - Giant Papillary Conjunctivitis) नाम की एलर्जी हो सकती है, जिसमें आंखों के अंदरूनी हिस्से में दाने निकल आते हैं।
डॉक्टर द्वारा बताए गए शेड्यूल का सख्ती से पालन करें। अगर लेंस 30 दिन का है, तो 31वें दिन उसे डस्टबिन में डाल दें। कभी भी एक्सपायर्ड लेंस न पहनें।
अगर आप कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, तो आपको अपनी आंखों के प्रति बहुत सतर्क रहना चाहिए। अगर आपको नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी महसूस हो, तो इसे हल्के में न लें:
अगर आपको ऊपर दिए गए कोई भी लक्षण दिखते हैं, तो सबसे पहले घबराएं नहीं और नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें:
एक सुरक्षित और स्पष्ट दृष्टि (Clear Vision) के लिए एक सही रूटीन फॉलो करना बहुत जरूरी है:
आपकी आंखें बहुत अनमोल हैं। कॉन्टैक्ट लेंस आपकी सहूलियत के लिए हैं, परेशानी बढ़ाने के लिए नहीं। थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी अपनाकर आप अपनी आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ और सुरक्षित रख सकते हैं।
यदि आपको कॉन्टैक्ट लेंस पहनने में कोई परेशानी हो रही है, आंखों में लगातार सूखापन लगता है, या इन्फेक्शन के कोई संकेत हैं, तो आज ही लखनऊ के Susanjeevani Hospital में संपर्क करें।