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भारत में दादी-नानी के नुस्खे सदियों से चले आ रहे हैं। जब भी हमारी आँखों में थोड़ी जलन होती है, या थकान महसूस होती है, तो हम डॉक्टर के पास जाने के बजाय रसोई की तरफ भागते हैं। कभी गुलाब जल, कभी शहद, तो कभी ठंडा दूध—हम बिना सोचे-समझे अपनी आँखों में डाल लेते हैं।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो चीज़ त्वचा या पेट के लिए अच्छी है, क्या वह आँखों जैसी नाजुक जगह के लिए भी सुरक्षित है?
अक्सर लोग छोटी समस्याओं के लिए घरेलू इलाज करते हैं और जब स्थिति बिगड़ जाती है, तब वे किसी आँखों के अस्पताल eye hospital in lucknow की तलाश करते हैं। लेकिन तब तक कई बार देर हो चुकी होती है। आज इस ब्लॉग में हम उन सभी घरेलू नुस्खों का सच जानेंगे जो आप वर्षों से इस्तेमाल कर रहे हैं।
सबसे आम नुस्खा है—गुलाब जल। हम मानते हैं कि यह आँखों को ठंडक देता है और गंदगी साफ़ करता है।
बाज़ार में मिलने वाला ज़्यादातर गुलाब जल "कॉस्मेटिक ग्रेड" (Cosmetic Grade) का होता है। इसका मतलब है कि यह चेहरे पर लगाने के लिए बना है, आँखों के अंदर डालने के लिए नहीं।
डॉक्टर की सलाह: अगर आँखों में थकान है, तो गुलाब जल की जगह ठंडे पानी की पट्टी (Cold Compress) रखें। आँख के अंदर कुछ भी डालने से बचें।
कई लोग मानते हैं कि आँखों में शुद्ध शहद या सुरमा लगाने से मोतियाबिंद (cataract) नहीं होता और रोशनी बढ़ती है। कुछ लोग इसे 'कंजंक्टिवाइटिस' (आँख आना) का इलाज भी मानते हैं।
चिकित्सीय दृष्टि से यह एक बेहद खतरनाक आदत है।
सुबह उठते ही ठंडे पानी के ज़ोरदार छींटे आँखों पर मारना बहुत से लोगों की दिनचर्या है। हमें लगता है इससे नींद खुलेगी और आँखें साफ़ होंगी।
आँखें धोने का यह तरीका गलत है।
सही तरीका: आँखों को साफ़ करने के लिए छींटे न मारें। बस चेहरे को धोएं और आँखों के कोनों (Corner) को गीले साफ़ कपड़े से पोंछ लें।
कुछ लोग आँखों में जलन होने पर कच्चा दूध या देसी घी डालते हैं।
दूध बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे अच्छी जगह है। आँख में दूध डालने का मतलब है—बैक्टीरिया को दावत देना। इससे बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस (Bacterial Conjunctivitis) बहुत तेज़ी से फ़ैल सकता है। घी भी आँखों के 'पोर्स' (छिद्रों) को बंद कर सकता है, जिससे पलकों पर दाने (Stye/Bilni) निकल सकते हैं।
अब सवाल यह है कि अगर घरेलू नुस्खे नहीं अपनाएं, तो आँखों को राहत कैसे दें? यहाँ कुछ मेडिकली Medically Verified eye care tips दिए गए हैं:
अगर आँखों में थकान, जलन या सूखापन लग रहा है, तो डॉक्टर की सलाह से एक अच्छी 'लुब्रिकेटिंग ड्रॉप' (Artificial Tears) का इस्तेमाल करें। ये पूरी तरह सुरक्षित हैं और आँखों को नमी देती हैं।
अगर आप कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करते हैं, तो हर 20 मिनट में अपनी पलकें 10-15 बार झपकाएं। यह आँखों का सबसे अच्छा प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र है।
थकान या हल्की सूजन के लिए, एक साफ़ तौलिये को ठंडे पानी में भिगोकर निचोड़ लें और उसे बंद आँखों पर 5-10 मिनट के लिए रखें। यह गुलाब जल से कहीं बेहतर और सुरक्षित है।
हर 20 मिनट के बाद, 20 फीट दूर रखी किसी चीज़ को 20 सेकंड के लिए देखें। इससे आँखों की मांसपेशियों का तनाव कम होता है।
आँखों से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए हमेशा विशेषज्ञों पर भरोसा करें। सुसंजीवनी हॉस्पिटल (Susanjeevani Hospital) में हम आधुनिक तकनीकों और सुरक्षित तरीकों से आपकी आँखों की देखभाल करते हैं। हमारे विशेषज्ञ डॉ. हमेशा यही सलाह देते हैं कि बचाव इलाज से बेहतर है, लेकिन गलत बचाव (घरेलू नुस्खे) बीमारी से भी बदतर हो सकता है। साफ़ देखें, सुरक्षित